मेरे पति की मृत्यु हो गई, वो मेरा अपना मकान था नॉएडा में, और वो दिल्ली में लॉज में रहता था, मेरा ऊपर का फ्लोर खाली था, तो मैंने सोचा की क्यों ना सुबोध को यही रहने के लिए कह दू, घर में एक मर्द भी हो जायेगा नहीं तो अकेली औरत की फैमिली को तो आप समझ सकते है.तो मैंने सुबोध को कह दिया की सुबोध तुम चाहो तो ऊपर बाले फ्लोर पे रह सकते हो, तुम्हारा लॉज का किराया भी बच जायेगा, और वो यही आ गया रहने के लिए, लड़का बहुत ही अच्छा था तो हमलोग को लगा की ये हमलोग का सहारा हो जायेगा.मेरी बेटी जो की 22 साल की है उसका नाम है निशा वो यूनिवर्सिटी से एम ए कर रही है, और सुबोध भी एम ए कर रहा है दोनों का सब्जेक्ट राजनीती शास्त्र है, तो दोनों को काफी हेल्प होने लगा, वो लोग आपस में बातचीत करते और पढाई भी करते.मुझे भी अच्छा लगने लगा की जो मेरी फूल सी बेटी हमेशा पापा के जाने के बाद उदास रहती थी उसके चेहरे पे हसी थी, मुझे भी अच्छा लगा. XXX Hindi मैंने काफी समझाने की कोशिश की पर वो नहीं माना उलटे बोला की मैं आप लोग को छोड़कर चला जाऊंगा, मैं डर गई मुझे बदनामी का डर था, मैंने हां कर दिया, निशा और सुबोध की















