मैं खुश हो गयी और ऑखें बंद करके इंतेज़ार करने लगी. अब मैं टांगे पूरी फैला सकी. हिंदी XXX सोने का ढोंग करते मैं लेटी थी. अपने होंठ और जीभ से उसे रेस्पॉन्स दिया. छठे दिन मेने साड़ी भी एकदम नीचे पहन ली. फिर मैने देखा की उसने अपना दूसरा हाथ बाहर निकाल के मेरी और बढ़ाया. मेरा नाम कल्पना है. जब में उसके रूम पर गई, तो दरवाज़ा बंद था और कमरे से कुछ आवाज़ आ रही थी. अब उसे मेरी गोरी बाहें भी देखने को मिलती थी.तीसरे दिन मैने एकदम पारदर्शक –ब्लाउज पहन ली, जिस मे से मेरी काली ब्रा साफ दिखाई देती थी. में भी उसे ज़्यादा डिस्टर्ब नही करती थी. फिर थोड़ी पकड़ ढीली कर के वो होठों को छोड़ के नीचे उतरने लगा. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.फिर उसके हेड के पास पहुँची. में दरवाज़ा नॉक करने वाली थी की ख्याल आया, खिड़की से देख लू.उस रूम की एक खिड़की हॉल मे पड़ती थी. तुरंत समझ लिया और दोनो एक लंबी अच्छी किस मे खो गये.होंठ से होंठ और जीभ से जीभ मिल गये. दोनो को बड़ा मज़ा आया और चुदाई के बाद लेट गये। उसके बाद तो तीन दिन और थे हमारे पास. एक लो कट वाली मेरी पुरानी शादी के समय की ब्लाउज निकाली.उस समय के अनुसार, अब मेरे बूब्स बड़े










