अब मजा आएगा..मैंने अपने लण्ड को धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करना चालू किया। पहले तो मुझे भी थोड़ी तकलीफ हुई, पर जब उसकी चूत के रस ने मेरे लण्ड के रास्ते को आसान बना दिया तो लण्ड पेलने में मुझे मजा आने लगा। अब मैं अपना लण्ड पूरा जड़ तक उसकी बुर में चांपने लगा।ओजस्वी की आँखों से अभी आंसू बह रहे थे, पर उसने अब चीखना बन्द कर दिया था। जिससे मुझे थोड़ी राहत मिली। मैंने अपना हाथ जैसे ही उसके मुँह से हटाया तो वो धीरे से बोली- प्लीज मामा निकालो ना… बहुत दर्द हो रहा..मैंने उसे समझाते हुए बोला- बस बेटा थोड़ा और बर्दाश्त कर लो.. हिंदी XXX धीरे-धीरे करो ना…‘ओह सारी….मैं जरा जोश में आ गया था।’‘जोश में मेरी जान ही निकाल दोगे क्या?’‘अरे नहीं मेरी रानी… डोन्ट वरी.. ओजस्वी थोड़ी देर बाद एक मोमबत्ती जला कर लाई, जिससे थोड़ा बहुत उजाला हो गया था।वो उसे टेबल के ऊपर रख कर मेरी ही रजाई में आ कर अपना पैर डाल कर बैठ गई और औरतों की बातें सुनने लगी। ओजस्वी कुछ इस तरह से बैठी थी कि उसकी तनी हुई दोनों चूचियाँ मेरी नजर के सामने थीं। जिन्हें देख कर मेरा लण्ड अपना नियन्त्रण खोने लगा था।मैं अन्धेरे का पूरा फायदा उठाते हुए उसकी ऊचाईयों को अपनी आँखों से नाप रहा था। थोड़ी देर में ही ओजस्वी ने अपना पैर कुछ इस















