इस बीच पापा ने मुझे पूरी तरह से चुदाई के लिए तैयार कर लिया था। हालाँकि वो चाहते तो मुझे कभी भी चोद सकते थे। मैं उनसे चुदने के लिए तैयार थी लेकिन उन्होंने सब्र से काम लिया।इन 2 सालों में पापा ने मुझे मसल के, रगड़ के मेरे कमसिन शरीर को भरपूर जवान लड़की की तरह कर दिया था। मेरा शरीर पहले से ज़्यादा भर गया था और मेरी चूचियों में भी गज़ब का उभार आया था। मेरी कमर पतली थी लेकिन मेरी गांड की शेप पीछे से बला की उभार लिए हुए थी।मेरा रूप देखकर मेरे साथ पढ़ने वाले लड़कों के लंड तन जाते थे। हर कोई मुझे चोदना चाहता था लेकिन मैं सिर्फ पापा से चुदवाना चाहती थी। मैं घर पहुँच कर अपने रूम में घुसते ही अपनी जीन्स और टीशर्ट उतार कर फेंक देती और नंगी होकर अपने बदन को चूमती, सहलाती और मसलती… इस वक्त मेरे ख्यालों में सिर्फ पापा ही होते थे।मम्मी इस बात से पूरी तरह अन्जान थी कि उनकी पीठ के पीछे हम बाप बेटी क्या क्या कर रहे हैं। अब उनका पापा से झगड़ा भी पहले से कम हो गया था। लेकिन उनमें दूरियाँ अभी भी थी… मम्मी पहले से अधिक शराब की आदी हो गयी थी, वो अक्सर खोयी खोयी रहती।पर मैं उन पर ज़्यादा ध्यान न देकर अपने में मस्त रहती















