ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.और वो इस तरह धीरे से रगडती की मेरी नजर ना पडे लेकिन मै सब देखकर अंजान बने रहना चाहता था। काकी पूरी तरह गरम हो चुकी थी पर वो इस बात को जताना नही चाहती थी। वो फिर से फसल काटने लगी और मै आकर उनके दाहिने तरफ बैठ गया।काकी- देख बेटवा सूरज सिर पर चढे जा रहा है और अभी तक एक तिहाई फसल भी नाही कटी है.मै- काकी हो जाएगा आप चिंता मत किजिये.(इतने मे वही गाय जो थोडी देर पहले चुदवा रही थी वो खेत मे घुसने लगी.)काकी – बेटवा ये कहा घुसी चली आ रही है जरा हाक तो इसे वरना फसल नुकसान कर देगी.मै – हा काकी अभी हाकता हू इसे.(और मै उठकर उसे भगाने लगा और थोडी देर बाद आकर फिर बैठ गया.)मै – काकी एक बात पूछू.काकी- हा बेटवा पूछ.मै – काकी ये वही गाय है ना जो बाहर बैल के उपर चढने की कोशिश कर रही थी (ये पूछते हुए मेरी गांड फट रही थी.)काकी- हा हा हा हा हा अरे बुद्धु तू सच मे अनाडी है.मै- क्यू क्या हुआ काकी.काकी- अरे बेटवा ये गाय उपर नही बैल के नीचे थी.मै – काकी ऐसा क्यू वो दोनो कर रहे थे.काकी- बेटवा वो दोनो प्रेम संबंध बना रहे थे (और ये कहकर काकी का















