फिर जीभ से मेरे छेद पर गुदगुदी करती रही। मैं बस धीरे धीरे आहे भरता रहा। आह, चाची हो तो ऐसी। तभी मेरे लम्बूतरे से लण्ड पर उनका हाथ घूम गया। उन्होंने मेरी टांगों के बीच से फिर लण्ड को खींच कर पीछे ही निकाल लिया। फिर एक थूकने की आवाज आई और लण्ड थूक से भर गया। मेरे पीछे से लण्ड निकाल कर वो जाने क्या क्या करने लगी थी।अपने दोस्तों के साथ शेयर करे- गर्मी की छुट्टियों में चाचू मुझे शहर बुला लिया करते थे। मुझे भी उनके पास बहुत अच्छा लगता था। चाची मुझे बहुत प्यार करती थी। उन्हीं की मेहरबानी से मेरे पास एक मंहगी मोटरसाईकल और एक बढ़िया सेलफोन भी था। इसलिये मुझे यह भी आशा रहती थी कि चाची मुझे कुछ ना कुछ तो दिला ही देगी। Nazuk Badanमेरा और चाची का प्यार देख कए चाचू भी बहुत खुश थे। मैं तो अब कॉलेज जाने लगा था। बड़ा हो गया था। चाची की आसक्ति भरी नजरे मैं पहचानने भी लगा था, हांलाकि वो मुझसे पन्द्रह वर्ष बड़ी थी। अक्सर वो मेरे नहाने के समय मुझे तौलिया देने आ जाती थी और मुझसे छेड़खानी भी करती थी।मुझे सच कहूँ तो बड़ा ही आनन्द आता था। वो मेरा लण्ड खड़ा कर जाती थी। फिर मुझे मुठ मारनी ही पड़ती थी। मैंने चाची के नाम की बहुत बार मुठ















