अब कभी भी नहीं मिलूँगा। तो वो मान गई। अगले दिन मैंने प्लान बना लिया कि चोदना जरूर है तो मैंने हॉस्टल की चाभी ली, क्योंकि मैं उस हॉस्टल में रहा था और सीनियर था तो किसी की हिम्मत नहीं थी जो कुछ कोई कहता और वार्डेन से भी मेरी पहचान थी तो मैं उसको बहाने से अपनी बाईक पर ले आया और हम कमरा खोल कर बैठ गए।थोड़ी देर बाद मैंने दरवाजा बन्द कर दिया तो वो बोली- ये सिटकनी क्यूँ लगा दी?तो मैंने कहा- कोई आ न जाए और हमें देख न ले।तो वो बोली- क्या देख लेगा?मैंने कहा- मुझे चुम्बन करना है।उसने कहा- ऐसा कुछ नहीं होगा।तो मैंने कहा- प्यार करता हूँ यार।फिर भी तो वो चुप हो गई और मैंने उसे बाँहों में भर लिया और वो कसमसाने लगी। मैंने उसके होंठों पर चुम्मियों की बौछार कर दी, वो थोड़ी देर ही विरोध करती रही फिर पटरी पर आ गई। फिर मैंने उसे लिटा दिया और उसके दूध पकड़े और जोर से दबा दिए।वो चिल्ला उठी- उई.. दोस्तों मेरा नाम अवधेश है, मैं भोपाल में रह कर बी टेक की पढाई कर रहा हूँ. XXX Hindi अब कभी भी नहीं मिलूँगा। तो वो मान गई। अगले दिन मैंने प्लान बना लिया कि चोदना जरूर है तो मैंने हॉस्टल की चाभी ली, क्योंकि मैं उस हॉस्टल में रहा था और सीनियर















