रंग-बिरंगे वेशों में उत्तेजित देहों का मिलन, जहाँ वीर्य की अदला-बदली और जीभों की मल्लयुद्ध जैसी उत्तेजना भरी तांडव रचा

वो मेरे बूर को चाटने लगे। वो एहसास ना भूलने वाला है दोस्तों गजब की सिहरन हो रही थी मेरे बदन में मेरे रोम रोम खड़े हो गए थे मेरे दांत अपने आप ही पीसने लगे थे।और मैं खुद ही अपने टांगो को अलग अलग कर दी यानी खुद को चुदने के लिए सौंप दिया मास्टरजी को। दोस्तों फिर क्या था उन्होंने अपना लौड़ा निकाला और मेरे बूर पर लगा कर जोर से धक्का दिया, लौड़ा बार बार फिसल जा रहा था। बाहर वारिश हो रही थी। मेरी कराह निकल रही थी उन्होंने फिर से धक्का दिया फिर भी मेरी बूर में नहीं गया।उन्होंने मेरे बूर में थूक लगाया और अपने लौड़े पर भी उसके बाद उन्होंने बिच में रखकर पहले धीरे से थोड़ा अंदर किया मुझे बहुत दर्द हो रहा था। फिर उन्होंने जोर से अंदर धकेल दिया मैं कराह उठी। उन्होंने मेरे चूची को सहलाया और धीरे धीरे आगे पीछे करने लगे। दोस्तों धीरे धीरे मुझे दर्द कम हो गया। और वो फिर आराम से मुझे चोदने लगे। करीब पांच मिनट में वो झड़ गए अपना सारा माल मेरे पेट पर ही डाल दिया।और उन्होंने अपने कपडे पहने मैं भी कपडे पहनने लगी तो देखि मेरे बूर से खून निकल रहा था। मैं डर गई। तो मास्टरजी बोले कोई बात नहीं पहली बार जब लौड़ा बूर में जाता है तो

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