अब आगे- Muslim Romance Sex Kahaniकुछ ही देर में जन्नत अपने घर के गेट से सामने आई और कार की ओर बढ़ी। फुल व्हाइट ड्रेस उस पे बहुत जच रहा था। (हाँ मस्त ही तो लग रहा था)। कार में बैठते ही जन्नत अपनी विशिष्ट आवाज में बोली” हाय हैंडसम हाउ आर यू.”“ठीक हूँ, प्यारी लग रही हो.”“थैंक्स, चलें.”फिर मैंने कार आगे बढ़ा दी। जन्नत हमेशा की तरह शुरू हो गई यहाँ वहाँ की बातें और मैं बस “हाँ हूँ” ही करता रहा। पार्क में पहुंचने के साथ ही पहले वाली जगह पे कार पार्क करने के बाद मैंने जन्नत से कहा कि पिछली सीट पे चल कर बैठते हैं। फिर हम दोनों पीछे की सीट पे जा बैठे और अपनी अपनी साइड की फ्रंट सीट आगे करके पीछे हो गए।कुछ देर यूँ ही चुप रहने के बाद जन्नत ने मेरे गाल पे अपना प्यारा नरम हाथ रखा और पूछा “आज लास्ट टाइम पूछ रही हूँ, तुमसे खुद ही जब मन किया तो बुला लिया, क्या हो गया है तुम्हें क्यों चुप चुप से रहते हो और मुझ से दूर भी.”“दूर तो नहीं हूँ देखो तो तुम्हारे पास ही हूँ.”“चुप क्यों रहते हो.”सच तो यह था कि मेरे पास जन्नत की बातों का कोई जवाब नहीं था न मुझ पर अब इन बातों का कोई प्रभाव था। जिसकी आत्मा की हत्या हुई















