ऐसा काहे?काकी- आप तो इतने सालो की अनुभवी है तो आपका ही स्वादिष्ट होगा ना,ज्योति भाभी का नहीं.(इतना बोलते ही मेरे लंड ने ठुनकि मारी जिसे काकी बडे ध्यान से देख रही थी और मंद मंद मुस्कुरा रही थी, वो सब जानती थी की मै डबल मिनिंग मे बोल रहा हू इसलिए रह रहकर नजरे बचाकर अपनी चूत पर हाथ फेर रही थी).काकी – मै खूब समझती हू बेटवा तेरी बाते, तू कैसे कह सकता है कि मेरा स्वादिष्ट है जबकि तूने अबतक मेरा चखा ही नही।मै- (लंड मसलते हुए) चखा दिजिये ना काकी.काकी – सबर कर बेटवा चखा दूंगी तू जानता है ना सबर का फल मीठा होता है।मै – काकी आपका फल तो बहुत मीठा होगा.काकी – बेटवा ये तो तू चखने के बाद ही बताना।(इतने मे बाहर से आवाज आती है “बाबू कहा है आप ……?”)काकी – बेटवा देख तेरी ज्योति भाभी आ गई.(इतना कहकर काकी ने अपने सीने पर पल्लू ओढ लिया और अच्छे से बैठ गई।)मै – हा काकी.भाभी – बाबू मै आ गई खाना लेकर खा लिजिये.मै – हा भाभी परोसिये, काकी आप भी निकालिए अपना.काकी – हा बेटवा। ले खा ले।(इसके बाद हम तीनो ने खाना खाया खाना खाकर खेत के किनारे बैठे रहे भाभी मुझे घूरे जा रही थी मानो जैसे अभी चूत खोलकर दे दें।)भाभी – बाबू जलदी से काम निपटाकर चलिए घर















