लाहौर की देसी बीवी का गर्म मज़ा

आह, आह…”“अमित नही” खुशबू घबराई.“आआआ.”बाबुजी की चीख निकली, उनके सर से खून बह रहा था, मेरे हाथो में एक रॉड था जिसे मैंने पूरी ताकत से उनके सर पर दे मारा था, उन्होंने मेरे साथ जो किया लेकिन माँ के बारे में बोलकर गलती कर दी मेरे लिए अब सहना मुश्किल हो गया था, पास ही रखे एक लोहे के रॉड को मैंने दे मारा था.खुशबू तुरंत उन्हें छोड़कर खड़ी हो गई थी, सर से बहते हुए खून के साथ वो पलटे और मुझे आश्चर्य से देखा, हम दोनो की नजरे मिली ही थी की मैंने फिर से हाथ घुमाया और रॉड जाकर उसके जबड़े से लगा और उनका जबड़ा उखड़ गया.और एक आखिरी वॉर आधा माथा ही फट गया था, थोड़ी देर छटपटाने के बाद ही वो मर गए… खुशबू ने मुझे देखा और मैंने खुशबू को उसके आंखों में आंसू भी थे और प्यार भी, लेकिन मेरे दिलो दिमाग में बस शांति थी.एक साल के बाद…बाबुजी की हत्या किये एक साल बीत चुका था, मैं आज जेल से छूटने वाला था, ये एक साल शायद मेरी जिंदगी के सबसे अच्छे एक साल साबित हुए, जेल का एक साल और सबसे अच्छा जी हा, जीवन की नई सच्चाइयों को समझने और सहने का जो मौका मिला जिनसे मैं अब तक अनजान ही था.एक अदन सा सॉफ्टवेयर इंजीनियर ही तो था जो

लाहौर की देसी बीवी का गर्म मज़ा

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