घोड़ी बन जाओ, उसमें ज्यादा मज़ा आता है।” मुझे पता है ज्यादा मज़ा आता है, पर फिर भी एक डर था उसके लंड की लम्बाई मोटाई का, बहरहाल मैंने विरोध करने का मौका तो कहीं पीछे छोड़ दिया था। मैं घोड़ी बन गई।उसने मेरी कमर पर दबाव बना कर मुझे अपने हिसाब से नीचे कर लिया, अब मेरी चूत उसके सामने हवा में खुली थी, मगर वो उंगली मेरी गांड के छेद पर फिरा रहा था। “वहाँ नहीं, प्लीज़, मैं मर जाऊँगी…” मैंने बेड पर लेट जाना चाहा मगर उसने मेरी कमर थाम ली थी। “नहीं, डरो मत शहनाज़ मेरी जान, अभी इसका नंबर नहीं है।” वह हँसते हुए बोला।“शक्ल से तो बड़े शरीफ लगते हो, पर हो बड़े कमीने किस्म के इन्सान।” “एक इसी मामले में तो हर कोई साधू सन्त, सब कमीने होते हैं और तुम जैसी शरीफ औरतें हम कमीनों को ही पसंद करती हैं।” सही कह रहा था कमीना ! हिंदी XXX फिर एक ठोकर में उसने मेरी खुली हवा में फैली चूत में अपना लंड ठूंस दिया और मेरे कूल्हों को थाम कर बेरहमी से धक्के लगाने शुरू कर दिए।जब मैं वापस फिर अपने चरम पर पहुँचने लगी तो इस बार अपना मुँह बंद न रख पाई। “और ज़ोर से मनोज और ज़ोर से… हाँ-हाँ ऐसे ही… मनोज ऐसे ही… और और… फक मी हार्ड… कम ऑन , बास्टर्ड















