सहमति से जनगणना: इंडिया समर और कोडी स्टील का जंगली अंदाज़

इसे यहीं रखो… आज तुम दोनों बहनचोद मिलकर चोदो मुझे। मुझे भी अच्छा लगेगा…” ऐसा कहकर उसने दूसरा गिलास भी खाली कर दिया और मुझसे लिपट गई। हम दोनों ने भी उसी तरह दूसरा गिलास खाली कर दिया।दो-दो पैग शराब सबने एक झटके में पी ली तो नशा एकदम से चढ़ गया। मैं तृप्ति मैडम के बदन से खेलने लगा, उसे हर तरफ से कपड़ों के ऊपर से मसलने लगा। धर्मेश मुझे देख रहा था। मैंने उसे आँख मारी और उससे भी लिपट जाने को कहा। उसने सीधे हमला उसकी चूचियों पर कर दिया।तृप्ति मेरा लण्ड टटोलने लगी और जब धर्मेश आया तो उसका भी लौड़ा झंझोड़ने लगी। मैं समझ गया कि अब यह बुरचोदी मैडम तृप्ति जोश में आ गई है। तो मैं उसे बेडरूम ले गया, उसके एक-एक करके कपड़े उतारने शुरू किया। मैंने साड़ी खोली तो धर्मेश ने ब्लाउज़… मैंने ब्रा खोली तो धर्मेश ने पेटीकोट… बिल्कुल नंगी कर दिया हमने बुर चोदी तृप्ति को।वह बोली- “अब भोसड़ी के तुम भी नंगे हो जाओ। खोलो अपने-अपने लण्ड…”उसने हमारे कपड़े उतावले पन से उतार दिए। एक हाथ में मेरा लण्ड लिया और दूसरे में धर्मेश का… जितनी वह मस्त होती जा रही थी उतने ही हम लोग भी… लण्ड दोनों के दोनों टन-टना कर खड़े हो गये।तृप्ति बोली- वाह कितने मस्ताने लौड़े है यार?

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