मैंने उनको किश करना शुरू किया वो भी मुझे चूमने लगी फिर वो मेरे लुंगी के अंदर हाथ डालकर मेरा लंड पकड़ ली और सोटने लगी.मैं उस उस उस आह आह आह करने लगा फिर मैंने दीदी के कपडे उतार दिए वो बोलने लगी चोद दे अंकित मुझे चोद दे, मैं तुम्हारी ही होकर रह जाऊँगी, शादी शुदा होकर भी कुंवारी हु अभी तक मेरा सील नहीं टूटा है तू तोड़ दे, मैं चुद जाना चाहती हु, और वो मुझे कस के पकड़ ली और बोलने लगी जो करना है कर लो, मैं नहीं रोकूंगी.मैंने दीदी के चूत को चाटने लगा वो कामुक होने लगी और उनके कांख का डिओड्रेंट की खुसबू मुझे मदहोश कर ताहि थी, मैंने फिर उनके चूच को दबाने लगा और फिर निप्पल दो दांत से दबाने लगा वो बोलने लगी फाड़ दे मेरे बूर को, मुझे कुंवारी से औरत बना दो, तुम ही मेरा रात रंगीन कर दो.फिर मैंने अपना लंड निकाल के दीदी के चुत के ऊपर रख कर दीदी कहने लगी चोद मुझे, मेरा लंड उनके चुत को सलाम कर रहा था मैंने अपने लंड पे थोड़ा थूक लगाया और कस के धक्का मारा तो मेरा लंड का सुपारा ही अंदर गया मेरी दीदी चीख उठी और कहने लगी निकालो निकालो.मैंने बिना देर किया दुसरा धक्का लगाया वो छटपटा गयी और सिसकिया लेने लगी और















