देख सेठ तेरी बहन को इतनी तेज तेज पेल रहा है की आवाज वहां पर आ रही है!!…हूँ हूँ हूँ!!” दिव्यांक बोला.“हाँ भाई…..मैंने अस्मिता से बोल दिया था की खुलकर चुदवाये। सेठ पर कोई रोक टोक ना लगाए” मैंने कहा.“दोस्त….आज मेरी बहन तो रंडी बन गयी!!” दिव्यांक बोला और फिर से बियर की बोतल को मुँह से लगाकर पीने लगा.“क्या करता यार……पैसे के लिए बहन को रंडी बनाना ही पड़ा!!” मैं कहा.उसके बाद तो कोई १ घंटे तक फट फट की आवाज अस्मिता के कमरे से आती रही। “आह …ओह माँ माँ…..तेज तेज सेठ जी….ओह्ह्ह..और तेज पेलो सेठ जी…..आऊ आऊ ऊँ उंहू उंहू!!” अस्मिता की मीठी आवाजे मैं और दिव्यांक बाहर सुन रहे थे। मैं कैसा भाई था, पैसे के लिए अपने बहना को ही कस्टमर से चुदवा रहा था।बीच में मेरा लंड बहुत तेज खड़ा हो गया। मन हुआ की अभी कमरे में घुस जाऊ और अस्मिता की चूत में अगर सेठ का लौड़ा है तो उसकी गांड में अपना लंड डाल दो और उसको एक असली रंडी आज बना दूँ। मन तो मेरा बहुत हो रहा था, फिर सोचा की इससे तो सेठ का मजा ख़राब हो जाएगा। क्या पता नाराज हो गया तो कहीं पैसा नही ना थे।उपर से ये रंडीबाजी चोरी छिपे घरों में होती है। सेठ से पैसा भी खुलकर नही मांग सकता। दोस्तों, ये सब सोचकर















