उसके बाद वो मुझसे बोली कि जा और भी ज्यादा मज़े कर.अब मैंने उनको धन्यवाद कहा और में घर से बाहर निकल गया, लेकिन मुझे उस दिन अपने कॉलेज तो जाना ही नहीं था, वो सब कुछ मेरा एक नाटक उनको चुदते हुए देखने की एक सोची समझी साजिश थी, जिसको उन्होंने सच मान लिया था और इसलिए में अब हमारी गली के कॉर्नर पर मेरे एक दोस्त के यहाँ पर गया और में वहीं पर उसके पास रुक गया, क्योंकि वो पिछले चार दिनों से बीमार था, में उससे उसका हालचाल तबियत की जानकारी लेने लगा.फिर करीब 9 बजे मैंने देखा कि हमारी गली में एक कार आई और में करीब पांच मिनट बाद अपने दोस्त के घर से बाहर आ गया. हिंदी XXX अब आशीष ने सही मौका देखकर तुरंत दीदी का वो सफेद रंग का टॉप उतार दिया और तब मैंने देखा कि उन्होंने नीचे भी सफेद कलर की ब्रा पहनी हुई थी और अब उसने उनकी ब्रा को भी उतार दिया.फिर वो बूब्स के बाहर आते ही मेरी दीदी के लटकते हुए बूब्स को अपने मुहं में लेकर चूसने लगा और दूसरे बूब्स को दबाने सहलाने लगा, जिसकी वजह से दीदी जोश में आकर उसके सर पर अपना एक हाथ रखकर उसके बालों को सहला रही थी. दोस्तों उनका शुरू से ही मुझसे बहुत अच्छा व्यहवार था और हम दोनों















