मैं दोनो हाथों से अपने यौवन को छुपाने की असफल कोशिश कर रही थी. हिंदी XXX वो पीछे से धक्के मार रह था जीसके कारण मेरे बडे बडे स्तन किसी पेड के फलों की तरह हील रहे थे.“ले इसे चूस कर खड़ा कर,” कह कर ब्रजभूषण ने अपने ढीले पडे लंड को मेरे मुँह मे ठूंस दिया.उसमे से अब हम दोनो के वीर्य के अलावा मेरे ख़ून का भी तसते आ रह था. अब चल उठ,” ब्रजभूषण ने कहा, “अगर तू राजी ख़ुशी करवा लेती है तो दर्द कम होगा और अगर हमे जोर जबरदस्ती करनी पडे तो नुकसान तेरा ही होगा.”मैं रोते हुये उठ कर खडी हो गयी.“हाथों को अपने सीर पर रखो.”मैंने वैसा ही किया.“टागों को चौड़ी करो.”“अब पीछे घुमो.”उन्होने मेरे नग्न शरीर को हर एंगल से देखा. शादी के बाद ब्रजभूषण दिल्ली वापस चला गया. जांघों के बीच भी सुजन हो गयी थी. बहुत गहरा मेकअप कर रखा था. बता देना अपनी मम्मी से की कल तू हमारे यहीं रात को रुकेगी. अगले दिन शाम को ६ बजे को तैयार हो कर अपनी होने वाली ननद के घर को निकली. मेरी टाँगें दर्द से छटपटाने लगी. फिर निप्पल्स चूसने और काटने का दौर चला. आधा लंड बाहर निकाल कर फिर तेजी से अंदर कर देता था.लंड गले तक पहुंच जाता था. सामने प्रवेश द्वार बंद था.





