ओ हो हो….”मैं चीख रही थी।फिर कुछ तेज धक्के मारते मारते वो मेरे भोसड़े में ही झड गया। हम दोनों एक दुसरे से लिपट गये। मैं भी चुदने के बाद उसे पागलों की तरह प्यार करने लगी। आज एक गैर का लंड खाकर मुझे बहुत आराम मिला। उसके बाद हम दोनों गोदाम से निकल आये और वापिस दूकान पर आ गये।धीरे धीरे उसका मुझ पर विश्वास बढ़ने लगा और वो मुझ पर पूरा भरोसा करने लगा। उसकी झगड़ालू बीबी तो पहले ही तलाक ले चुकी थी, इसलिए अब मुझे रोकने वाला कोई नही था। पर राजेश की माँ मुझ पर नजर रखती थी और राजेश से कहती थी की मुझ पर जादा विश्वास ना किया करे।पर मैं राजेश को चूत देकर पता लेती थी। धीरे धीरे मुझे मालुम हो गया की वो अपनी तिजोरी की चाभी कहां रखता था। उसकी दूकान में एक सीक्रेट जगह थी जहाँ तो अपनी तिजोरी की चाभी छुपाता था। एक दिन जब राजेश बनिया की माँ अपने मायके गयी हुई थी तो उसने मुझे बुलाया।मैं रात के १० बजे एक सेक्सी सी ड्रेस पहन कर उसके घर पर पहुच गयी। आम तौर पर जब उसकी माँ घर पर होती थी तो वो मुझे घर में नही ले जाता था, पर आज तो कोई नही था। राजेश बनिया ने पार्टी का फुल मूड बना रखा था। उसने मुझे















