अब जाने दीजिये।”मैंने कहा, “यार इतनी मेहनत से जंगल साफ किया है कम से कम उसका मेहनताना तो दोगी ना।”“अब नहीं!” बोलकर वो उठने लगी।मैंने तय किया था कि किसी भी स्तर पर तृप्ति के साथ जबरदस्ती नहीं करूंगा इसीलिये मैं तुरन्त पीछे हट गया, और बोल दिया “ठीक है अगर तुम नहीं चाहती तो जा सकती हो।”बिस्तर पर लेटी-लेटी वो तिरछी नजरों से मुझे देखती रही, फिर बोली, “जीजू, आपसे एक बात पूछूं क्या?”“हाँ पूछो।”“आप इतने अच्छे क्यों हो?”“क्यों अब मैंने क्या कर दिया?”“मैं इस समय आपके सामने बिल्कुल नंगी लेटी हूँ, आप कुछ भी करते तो मैं मना नहीं कर पाती, पर आप मेरे एक बार मना करने पर ही पीछे हट गये।”“देखो तृप्ति, सैक्स प्यार का विषय है, सैक्स के बिना प्यार अधूरा है, और दो लोग जब सैक्स करते हैं तो वो उन दोनों को शारीरिक रूप से कम बल्कि मानसिक रूप से अधिक जोड़ता और संतुष्ट करता है, और आप जबरदस्ती से ना तो किसी का प्यार पा सकते हैं ना ही दे सकते हैं और ना ही किसी को जबरदस्ती संतुष्ट कर सकते हैं। इसीलिये जबरदस्ती का सैक्स मुझे पसन्द नहीं है।”तृप्ति मेरी बात को बहुत गौर से सुन रही थी, वो बोली, “इस समय अगर आपकी जगह और कोई भी होता और मैं उसके सामने ऐसे नंगी लेटी होती तो शायद मेरे लाख मना करने















