गर्म देशी बीवी की चुदाई

लंड का लोहा गरम था और अब तक चूत के दरशन नहीं हुए थे, अगर हो जाते तो क्या मैं वहीं झड़ जाता। वो मेरे लंड को सहला कर खड़ा कर चुकी थी और अपने चूंचें नंगे दिखा कर मेरी सांसे तेज भी कर चुकी थी। उसके भूरे निप्पल मुझे बहका रहे थे कि मेरे गांड की तरफ उसने अपना हाथ फिराते हुए मेरे अंडों को हल्का सा दबा दिया.मेरी चीख निकलने वाली थी कि भाभी बोली अरे देवर जी कुछ करोगे कि बस टकटकाते रहोगे, मुझे ही चोदना पड़ेगा क्या तुम्हें। मेरी हिचक जा चुकी थी, फुटबाल का प्लेयर था मैं अपने कालेज में तो अब आया खिलाड़ियों वाला स्पिरिट, साली को वहीं बेड पर पटक कर उसके दोनों बुम्बाट चूंचे पकड़ कर एक को मुह में दबोच लिया और दूसरे को दोनों हाथों से मसलने लगा।वह उम्माह, आह धीरे धीरे दबाओ दर्द होता है करने लगी पर मैं नहीं रुका। लगभग चार मिन्ट तक इन चूंचियों को मसलने के बाद मैने उसकी कमर के नीचे अपनी जीभ फिरानी शुरु कर दी।यह सेक्सी कहानी आप राकेश के मुह से सुन रहे हैं। वो मेरे बालों को पकड़ के लगभग उपर की तरफ खींच रही थी.मैने उसके रसभरे होटों पर होट रखे और पीठ पर अपने नाखून खुरचते हुए उसकी कमर और पीठ का सारा हिस्सा अपने नाखुनों से लहूलुहान कर डाला।

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