गर्म देशी भाभी के उभरे हुए मुम्मे

उनका नाम कमलेश सिंह है, और वो सच में अपने गाँव के चौधरी ही है. मैं डर के मारे अपनी साड़ी के पल्लू को उंगलियों से खेलने लगी.‘बैठो..घर अभी दूर है..’ पापा मेरे पास आकर रुके और कहा. हिंदी XXX अब वो पिघल रहे थे.‘कुछ नहीं पापा..मुझे आपके बाल पसंद आ गए है..कितने घने है..और मुलायम भी. मैंने उन्हें अपने से हटा दिया और कहा ‘ऐसे ही प्यार करना था तो वो तो उपेन भी करता है..मुझे दीक्षा की तरह जंगली प्यार चाहिए.’मैंने बेशरम बनते हुए पापा से कहा. इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती वो मेरे पास आये अपने दोनों हाथ मेरे ब्लाउज पर रक्खे और एक ही झटके में मेरे ब्लाउज को फाड़ दिया.मैं तो पापा को देखती ही रह गयी, इससे पहले कि मैं और कुछ समझू उन्होंने मेरे बूब्स को अपने दोनों हाथो में दबोच लिया, उनके हाथो में कितना जोर होगा आप समझ ही सकते हो, उनके हाथो ने जैसे मेरे बूब्स को दबाया कि मैं सहन नहीं कर सकी और 3 इंच ऊपर हो गयी. मैं एकदम से डर गयी और मैंने पापा को आवाज़ दी.‘पापा..’‘हाँ..क्या हुआ, लाइट ही गयी है. इन्हें सहलाने में भी मजा आता है.’ और मैंने पापा से भोले अंदाज़ में कहा और उनहे हाथ से हटकर मैं पापा के सीने पर आ गयी.अब मैं पापा से एकदम चिपक गयी थी. मैं पापा

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