फिर मुझे गुस्सा आ जाता। मैं हर लड़के को भगा देती। घर आती , अपने कमरे का दरवाजा बंद करती और कपड़े उतारकर मैं सबसे पहले मुठ मारती। चूत को शांत करती। फिर घर के कपड़े पहनती। दोंस्तों अब मैं 25 साल की हो गयी और ये 8 साल मैंने मुठ मारकर ही गुजारे। “Sexy Girl Masturbation”अब तो जैसे शराबी को शराब की लत लग जाती है वैसे मुझे भी लत लग गयी थी। अब तो कोई दिन नही जाता था जब मैं मुठ ना मारू। अब मैं इतनी एक्सपर्ट हो गयी थी की बैगन, मूली, गाजर, और टूथब्रुश से भी मुठ मार लेती थी। फिर मेरी तकदीर का ताला खुला। मेरे पापा के 2 खास दोस्त थे श्रीवास्तव जी और शुक्ला जी।उनको कुछ मेरे पापा से काम पड़ता था। पापा वकील थे, श्रीवास्तव और शुक्लाजी की नौकरी में प्रमोशन होना था। ऊपर के अधिकारी उनके प्रमोशन नही कर रहे थे। इसी पर दोनों ने मुकदमा कर किया था। बस इसी वजह से दोनों मेरे घर रोज आने लगे। 4 5 घण्टे रोज बैठते। मैं उनदोनो के लिये चाय पकोड़ा लेकर जाती।और प्रिया बेटी कैसी हो?? अब कितनी सूंदर दिख रही थी मेरी चूत अब. हिंदी XXX वो मुझसे हाल चाल पूछते ।ठीक है! मैं कहती और मुस्काती।धीरे धीरे मेरी उन दोनों से जान पहचान अच्छी हो गयी। एक दिन मैं अपना वही कसा










