देख हम दोनों भाइयों को चुप चाप चूत दे दे! XXX Hindi पर मैं इस औरत को पेलूंगा जरूर मैंने अनुपम से कहा।उस शौच आयी औरत को मैंने उठाया और बिछी चारपाई पर पटक दिया। लालटेन की पीली रौशनी में मैंने देखा रो रोकर उसका बुरा हाल था। छोड़ दो मुझे भगवान के लिए! अबे मुठ मार लेगा तो इस मछली को कैसे पेलेगा?? छोड़ दो! चुदाई में आदमी औरत दोनों को मजा मिलता है!! अनुपम बोला.अनुपम! मैंने उस शादी शुदा औरत से कहा।इससे पहले मैं जब कभी गांव जाता था तो यहाँ के घरों की सारी जवान औरते नयी बहुवे हाथ भर भरके चूड़ी पहनती थी, चाँदी की मोटी मोटी पायल पहनती थी। ज्यादातर जवान मालदार चुच्चे वाली औरते गांव की कच्ची सड़कों पर बैठकर ही चूड़ी और पायल हिला हिलाकर कड़ाई और बर्तन ईंट से घिसती थी।उस वक़्त वो बड़ी सेक्सी लगती थी। जमीन पर बैठके बर्तन मांजने से उसकी विशाल दुधभरी छातियां हर राहगीर देख लेता था। उसे भी कुछ घण्टों के लिए सुकून मिलता था। बस तभी से ख्वाहिश थी की किसी गाँव की गवारिन लेकिन मालदार औरत को कास एक बार चोदने खाने को मिलता। सायद आज ये छिपी ख्वाहिश पूरी होने वाली थी।ऐ छिनार!! मेरे भाई! मैंने कहा.रो रोकर छिनाल के आँशु उसके मुँहपर बिखर गये थे। मैंने उसके ओंठ पिने लगा तो नमकीन आँशु मेरे मुँह में















