गोरी देसी बहू की काली चूत में जीभ घुमाते हुए 69 का मजा

ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.मैं- तू सुबह सुबह.नीलम- चाय लाइ थी.मैं- ला.मैंने उसके हाथ से कप लिया पर वो वही खड़ी रही तो थोड़ी मुश्किल सी हो गयी उस रात उसने मुझे देख लिया था तो हम दोनों ही कुछ बोल न पा रहे थे.पर अचानक वो बोली- दीपक उस रात.मैं- वो तेरा मामला है नीलम, तेरी निजी जिंदगी है तू जैसे चाहे जी पर गलती मेरी है मुझे ऐसे टांक झाँक नहीं करनी थी.नीलम- मेरी बात सुन तो सही.मैं- उस रात के अलावा कुछ कहना है तुझे.नीलम कुछ कहना चाहती थी पर तभी हमने ताऊ को आते देखा मैं चारपाई से उठ गया.ताऊ- दीपक, तेरी ताईजी को आज बड़े मंदिर जाना है तो तू साथ चले जाना और खेत पर आने की जरूरत नहीं आज मैं यहाँ हु मैं संभाल लूंगा यहाँ.मैंने गर्दन हिलायी और चल दिया कुछ दूर जाके मैंने मुड़के देखा तो ताऊ का हाथ नीलम की कमर पे था,मैं समझ गया आज फिर इनका कार्यक्रम होगा पर कैसे आज तो मिश्री भी यही है सोचते सोचते मैं घर पर आ गया.ताईजी- नाश्ता कर ले.मैं- वो ताऊजी ने कहा है की आपके साथ बड़े मंदिर जाना है.ताई- पर मैंने तो उनको साथ चलने को कहा था पर कोई बात नहीं नाश्ता करके तैयार होजा फिर चलते है.करीब एक घंटे बाद हम दोनों मंदिर

गोरी देसी बहू की काली चूत में जीभ घुमाते हुए 69 का मजा

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