जब वो थोड़ा झुकी तो आधी चूची मेरे सामने हो गया, क्या बताऊँ दोस्तों वही से मेरा मन ख़राब हो गया क्यों की मेरा लंड फन फना रहा था.अब मैं किसी तरह से लंड को दबा के आगे बड़ा, ऑन्टी भी आगे मटकती हुई चल रही थी, मैंने उनके बदन को निहार रहा था. XXX Hindi पूरा रगड़ खा रही थी. ओर अपने चूत में मेरा लंड पकड़ का डाल ली, और जोर जोर से आगे पीछे होने लगी. ऑन्टी अंगड़ाई लेती हुई जोर जोर से आह आह फ़क में फ़क में कह रही थी.और मैं जोर से आवाज निकाला और मैं अपना लंड ऑन्टी के चूत में भर दिया, दोनों एक दूसरे को पकड़ के सो रहे थे, फिर ऑन्टी पेशाब करने जाने लगी. कल ये कहानी दो दिन पहले की ही है. आह आह आह , फिर मेरा निकलने लगा. मेरा घर वह से थोड़ा दूर पड़ता था, तो प्रतिक बोला की तुम यही आराम कर लो, बाद में घर चले जाना, आज रात को यही रूक जाओ.दिन के करीब २ बज रहे था, कहना खाकर मैं सो गया था, और जब मैं ६ बजे के करीब उठा तो घर में कोई नहीं था, सिर्फ आंटी थी, पुनम ऑन्टी, मैंने पूछा आंटी प्रतिक कहा है, तो वो बोली बेटा, वो मासी के यहाँ गया है, गोरखपुर एक जरूरी फ़ोन आ गया था















