मैं तुम्हारे बिना जी नही पाऊंगा!!” मैंने उससे कहा। फिर वो बिना कुछ कहे चली गयी वहां से। फिर वो ५ दिन तक टिफिन देने नही आई। उसकी माँ और रमेश काका की पत्नी अब टिफिन देने आती थी। ६वे दिन सोना मेरे घर आई और सीधा मेरे कमरे में आकर मुझे लिपट गयी।“अवधेश!! XXX Hindi ….हाय ….कितना बड़ा है!!” सोना मेरा led टीवी देखकर बोली।“तुमको पसंद आया???” मैंने पूछा.“हाँ !! उसने नजरे उठा दी तो लगा की जैसे दिन हो गया हो और सुबह हो गयी हो। चुदाई की लाज उसकी आँखों में मैं साफ़ देख सकता था। “चुदाई में मजा आया की नही????” मैंने साफ साफ़ किसी बेशर्म लड़के की तरह पूछ लिया। अब चुदवा चुकी सोना लजा गयी और और फिरसे उसने निगाहें गिरा दी। दूसरी बार चुदवाने की तरफ अब मैं बढ़ने लगा।कुछ देर में मेरा लंड उत्तरी कोरिया की परमाणु मिसाइल की तरह फिर से खड़ा हो गया। मैंने लंड को हाथ से पकड़कर सोना की पीठ पर लगाना शुरू किया। सोना पेट के बल मेरे बिस्तर पर औंधी लेटी थी। कुछ देर बाद मैंने बैठकर उसके दोनों पुट्ठों के बीच लंड उसके भोसड़े में दे दिया और उसको आधे घंटे और चोदा और उनकी रसीली चूत का लुफ्त उठाया। उसके बाद दोस्तों हमारे ड्राईवर की लड़की सोना मुझसे पूरी तरह से पट गयी और मैं हर हफ्ते उसकी










