अब और काबू नही होता! उसने अपना आँचल अपने ब्लॉउज़ से हटा दिया। मैं जान गया कि चूत ऑफर कर रही है।चल आ जा!! हिंदी XXX क्या मस्त सांसों की खुश्बू थी उसकी। कोई 29 30 साल की औरत थी वो। देखने में ही गरीब लग रही थी।उसका आदमी कुछ महीनो से सांस की बीमारी होने के कारण काम पर नही जा पाया था। इसलिए उस बेचारी के पास पैसे नही थे। मैं उसका आँचल हटा दिया। उसकी छातियां काफी बड़ी थी। मैंने एक एक करके ब्लाऊज़ के बटन खोल दिए। अंजू ने ब्रा नही पहनी थी। सायद उसका कोई छोटा बच्चा भी था।क्योंकि अंजू का दूध बह रहा था। उसके ब्लॉउज़ के पास उस दूध बहकर गीला हो गया था। इससे मुझे पता लग गया कि उसके कोई छोटा बच्चा भी था। मैंने उसका मम्मा अपने मुँह में भर लिया। लगा की मैंने कोई बड़ी वाली बन डबलरोटी मुँह में भर ली हो। मैं जब अंजू के दूध पीने लगा तो दूध मेरे मुँह में बेहने लगा।सायद अंजू को बच्चे को दूध पिलाने का वक़्त हो गया था। पर बेचारी पैसा नही होने से यहाँ मुझसे चुदा रही थी। मैंने अपनी डॉक्टरी वाली बड़ी सी कुर्सी पर बैठा रहा। अंजू को भी मैंने अपनी गोद में बैठा लिया। वो आराम से मुझे देने लगी। मैं एक एक करके उसके दूध पीने लगा।क्या मस्त















