आरती भागती हुई सी दुष्यंत के रूम मे पहुँची..वो चादर तान कर सो रहा था..आरती : “गुड मॉर्निंग जानू…देखो मैं आ गयी…”पर वो जाग रहा होता तो जवाब देता न…रात को वो ना जाने कितनी देर तक अपनी बहन और जुए के बारे मे सोचता रहा था..आरती : “अब ये नाटक छोड़ो…मुझे पता है तुम जाग रहे हो…नीचे का दरवाजा तुमने मेरे लिए ही खोलकर रखा था ना आज…”पर फिर भी कोई जवाब नही मिला.. हिंदी XXX पहला 7 नंबर था.. रास्ते मे दोनो के बीच आरती वाले मामले को लेकर कोई बात नही हुई…बस नॉर्मल बातें होती रही..और जुए के बारे में भी बातें हुई. पर उसे नही पता था की आने वाली दीवाली उसके लिए क्या-2 सर्प्राइज़ लाने वाली है..अर्पिता के हॉस्पिटल पहुँचते ही दुष्यंत फ़ौरन वहाँ से निकल गया…इतनी जल्दी मचाते हुए अर्पिता ने उसे पहली बार देखा था.. उसे देखते ही कमलेश ठहाका लगाकर हंस दिया…उसने अपने पत्ते सामने फेंक दिए उसके पास थे 9,10,11 की सीक़वेंस.वो जैसे ही सारे पैसे अपनी तरफ करने लगा, अमित ने रोक दिया और बोला : “मेरे पत्ते दोबारा देख भाई…इतना खुश मत हो अभी…”कमलेश और दुष्यंत ने फिर से अमित के पत्तो की तरफ देखा..वो थे तो 3,4,5 पर साथ ही साथ वो कलर मे भी थे…लाल पान का कलर..यानी प्योर सीक़वेंस.कमलेश बुदबुदाया : “साला…हरामी…आज तो इसकी किस्मत अच्छी है..”और अब ठहाका लगाने















