उसने बिना शो माँगे ही पैक कर दिया… अमित ने फिर से हंसते हुए सारे पैसे उठा लिए.दुष्यंत : “आज तो लगता है इसी का दिन है…दो गेम में ही डेड -दो हज़ार जीत गया…”अमित : “दुष्यंत भाई, ये तो वक़्त-2 की बात है…कल तुम्हारा दिन था…आज मेरा दिन है…और वैसे भी, अभी तो खेल शुरू हुआ है…शायद तुम जीत जाओ आगे चलकर…”दुष्यंत ने मन मे सोचा ‘वो तो होना ही है…एक बार अर्पिता को आने दो बीच मे..फिर देखना, तुम्हारी जेब कैसे खाली करवाता हूँ मैं…”अगला खेल शुरू हुआ..तभी दुष्यंत बोला : “मैं ज़रा बाथरूम होकर आता हू…तुम मेरे पत्ते अर्पिता को बाँट दो…तब तक ये खेल लेगी…”इसमे भला उन दोनो को क्या परेशानी हो सकती थी..उनके तो चेहरे और भी ज़्यादा चमक उठे.. अगली ब्लाइंड की बारी अर्पिता की थी…दुष्यंत ने 100 के बदले सीधा 500 की ब्लाइंड चल दी..हैरान होते हुए कमलेश ने भी 500 की ब्लाइंड चल दी.. हिंदी XXX वो जुए को हमेशा से बुरा मानती थी…पर उनके जो हालात थे, उसमे पैसे अगर जुआ खेलकर भी आए, तो उसे उसमे कोई प्राब्लम नज़र नही आ रही थी..दुष्यंत ने वो सारे पैसे ज़बरदस्ती अर्पिता के हाथों मे रख दिए और बोला : “दीदी, मैं उतना भी बुरा नही हू जितना आप मुझे समझती हो…मुझे भी माँ की फ़िक्र है..अब मुझे आप की तरह कोई जॉब तो देगा नही, इसलिए















