शुरू मैं हल्की फुल्की पहचान हुई मैं उसके बच्चों के लिए मंहगे चॉकलेट लाता.प्रज्ञा भाभी इम्प्रेस होने लगी उसके लटके झटके चेंज होने लगे. हिंदी XXX वो बेहद कामुक थी उसकी आँखों के इशारे मुजे उत्तेजित करते.एक दिन मैं उसके घर गया जब वो अकेली थी वो नाहा कर ही आयी थी वो बालो को दोनो हाथों से सूखा रही थी. मेरे हाथों की मालिश से उत्तेजित हो गर्मा गयी थी तभी बाहर किसी ने उसको आवाज लगाई हम दोनों अलग हुवे.प्रज्ञा …..हा… भाभी ….आयी मुजे रुकने का इशारा कर निकल गयी बात कर वापिस आयी मुजे समझाते बोली …भैय्य्या मैं शादीशुदा हु आप समझते क्यो नही आप को तो बहुत सी लडकिया मिल जाये गी.मैंने उसको अपने सीने से लगाया और उसके उसके पुट्ठे कस कर दबाए प्रज्ञा ….(मेरे कमर मैं हाथ डाल कर )मुझ मैं ऐसा क्या है मैंने उसका हाथ अपने लंड पर टच किया बोला इस शेर से पूछो प्रज्ञा भाभी (जोर से ठहाका लगाते बोली )ये आप का शेर तो बहुत गुस्से मैं है.मैं बोला इसको आप की गुफा मैं जाना है प्रज्ञा ..(आंख मारते बोली )है …….भगवान …….अंदर चलो बेडरूम मैं भैय्य्या उसकी साडी खुल चुकी थी.















