बहुत गुदगुदी हुई. अब उन्होंने भी अपने कपड़े उतार दिये। अब दोनों पैरों में काफी अंतर था. XXX Hindi बहुत गुदगुदी हुई. फिर चाची ने चाचा का लंड पकड़ लिया और मुझे उनके लंड पर बैठाकर ऊपर नीचे होने को कहा.मेरी चूत से चाचा का लंड रगड़ रहा था और मुझे अच्छा भी लग रहा था . आज से १५ साल पहले की बात है, मैं अपने पिता जी और माँ के साथ कानपूर से दूर एक कस्बे नरवाल में रहती थी. उनके वीर्य की गर्मी जैसे मेरी चूत के अंदर महसूस हुयी मैं एकदम से अकड़ गई और मुझे अंजाना सा सुख मिला.हम तीनो ऐसी ही हालत में उसी बिस्तर पर सो गए.मैं रात भर सोती रही और सवेरे ९ बजे मेरी आँख खुली.देखा चाची मेरे बगल में दूध का ग्लास लेकर बैठी हैं, वो ही मेरा चेहरा सहला रही थी जिससे मेरी आँख खुल गयी थी. अब तुम्हें कभी तकलीफ नहीं होगी.”और उन्होंने मुझे चादर पर गिरा खून भी दिखाया और कहा,” यही वो गंदा खून है जो हर महीने तुम्हें तकलीफ देता था. हम लोग कुछ समय पहले ही नरवाल आये थे और वहीँ के एक स्कुल के मैनेजर साहब के घर में रहते थे.















