मेरे अंग जहा जहा से खुले थे वहा साबुन लगी हथेली रगड़ने लगा. विनय ने मेरे दोनों हाथ पकड़ मुझे मेरे मम्मे ढकने नहीं दिए और चिढ़ाने लगा. XXX Hindi “होली में सेक्सी भाभी”विनय: “ऊप्स, सॉरी, हुक टूट गया, ज्यादा हिलो मत, चुपचाप कलर लगवा लो. एक हुक खुलने से उसको ज्यादा जगह मिल गयी थी. अभी तुमको पानी में डालना बाकी हैं. कपड़े बदलने की जगह नहीं थी तो कार में तुम लड़कियों ने कपड़े बदले थे और हम कार की खिड़की पर पीठ कर परदे बने थे.” (विनय की पत्नी का नाम सीमा था.)मैं: “पानी में धक्का भी तुम लोगो ने ही मारा था उस दिन. वहा भी तो तुम लोग बिकिनी में रहते थे मेरे सामने. पहले साड़ी निकालते हैं फिर तुम्हे पानी में डालूंगा.”मैं: “नहीं, तुम ऐसा नहीं कर सकते.”विनय: “अरे मैं करके बताता हूँ.”मेरी साड़ी का पल्लू गिर कर वैसे ही मेरे मुड़े हुए बाहों में आ गया था, उसने उसको वहा से हटाया. वैसे भी अब कोई रंग तो लगाने वाला ही नहीं था और कोई दिक्कत नहीं थी.मैंने मोतीया रंग की काम वाली साडी और उस पर सफ़ेद रंग का ब्लाउज पहन लिया और अच्छे से मेकअप कर देखने लगी, आने वाले सामाजिक कार्यक्रम में ये साड़ी कैसी लगेगी.















