सुहागरात नहीं माननी? हिंदी XXX आप भी.. सुहागरात नहीं माननी? तभी उन्होने कहा अरे वो बिल्कुल बुरा नहीं मानेगा क्योंकि उसे भी तो एक अच्छी माँ चाहिए। फिर मैंने उनसे कह दिया, आपको जो करना है वो करिए और अपनी आँखें बंद कर दी।तभी उन्होने कहा सोच लो। मैंने भी कह दिया हाँ अब मुझे सोने दीजिए। तभी वो मुझ पर वैसे ही सोए रहे। अब उनकी आँखें भी बंद हो गयी थी। थकी हुई होने की वजह से में भी सो गयी। फिर कुछ देर बाद वो उठकर कही चले गये। में नींद में ही थी और मुझे लगा ही था वो मेरे साथ मस्ती कर रहे है।अब में चैन से सो सकती थी थोड़ी देर बाद वो ऊपर आए और मुझ पर वापस वैसे ही सो गये। इस बार ज़्यादा कसकर अपना जिस्म आधे से ज़्यादा मुझ पर अपना पैर मेरे पैरो को लपेटकर, अपना सर मेरे गले से लगाकर और उनकी गरम सासें सीधे मेरी छाती को लग रही थी।फिर मैंने आँखें खोलकर देखा तो बल्ब की लाईट में मुझे दिखा कि उन्होने अपना कुर्ता निकाल दिया था और वो पूरी तरह नंगे थे। फिर में डर गयी मैंने उनकी हल्की बालो वाली छाती को धक्का मारना चाहा लेकिन वो भारी थी। मुझसे अब और जगा नहीं जाने वाला था में सो गयी। में गहरी नींद में थी जब मुझे साँस










