चलो हटो, गुण्डे कहीं के !’जीजू मेरे ऊपर से धीरे से हट गये और बिस्तर पर ही बैठ गये। जीजू का कड़क लण्ड पजामें में से तम्बू की तरह खड़ा हुआ था। मुझे बहुत खराब लगा, सारी मस्ती चूर चूर हो गई थी। उनके खड़े हुये लण्ड से चुदने को पूरी तैयार थी। उनके इस तरह से हट जाने से मैं परेशान सी हो गई। पर मुझे क्या पता था कि आगे के कार्यक्रम क्या है। मैंने अपनी शमीज ठीक की पर वो छोटी बहुत थी।‘जीजू, मुझे वो अपना…दिखाओ ना !’ मैंने तिरछी निगाह से जीजू के लण्ड की ओर देखा।‘क्या लण्ड देखोगी?’ जीजू ने मुझे फिर भड़काया, दिल तेजी से धाड़ धाड़ करने लगा.‘हाय कैसे बोलते हो…हाँ वही …’ मेरा तो जिस्म ही कांपने लगा था।‘पकड़ोगी मेरा लण्ड…?’ उन्होंने फिर मुझे शर्म से लाल कर दिया। मैंने शरमाते हुये हाँ कह दिया।‘चूसोगी…?’ वो फिर मुझे बोल बोल कर दिल तक को हिलाते रहे।‘धत्त…इसे कौन चूसता है?’ मेरी शर्म से भीगी आवाज निकली।जीजू ने अपना लण्ड बाहर निकाल दिया। आह्ह्ह ! XXX Hindi सच में उसका लण्ड बहुत ही सुन्दर, गोरा और बलिष्ठ लग रहा था। उसकी नसें उभरी हुई लाल सुर्ख सुपाड़ा बहुत ही अद्भुत और चमकदार था। मैंने शरमाते हुये किसी मर्द का लाल सुर्ख लण्ड पहली बार बार थामा।‘लण्ड थामा है तो साथ निभाना !’‘धत्त, ऐसे क्या कहते हो?’मैंने जीजू का















