हाथो में एक ट्रे था जिसमे पानी का एक ग्लास और चाय का कप था, पिता जी ने पहले पानी पी फिर चाय का कप पकड़ते हुए कुर्सी में पसर गए.“नही बहु यहां बहुत काम है, और इस गांव में ही तो मेरा सबकुछ है इसे छोड़कर कैसे जा सकता हु, यहां बसी यादे….” बस वो इतना ही बोल पाए.“तो क्या हम आपके अपने नही है.”पिता जी के होठो पर मुसकान आ गई” बेटा ये तुमसे किसने कह दिया की तुम मेरे अपने नही हो, लेकिन अभी अभी तो तुम दोनो ही शादी हुई है, थोड़ा प्रिवेसी भी तो चाहिए तुम दोनो को, और यहां मेरी सेवा करने के लिए नौकर भी तो है.”खुशबू के आंखों में आंसू आ गए थे.“क्या मेरे होते हुए आपकी सेवा नौकर किया करेंगे,” वो सुबकते हुए बोली, पिता जी खड़े हो गए और उसके सर पर अपना हाथ फेरने लगे, खुशबू पिता जी के छातियों तक ही आ रही थी.“अरे बेटा उदास क्यो हो रही हो, मैं आऊंगा ना तुमसे मिलने के लिए, लेकिन अभी नही अभी तुम दोनो जाओ अपनी गृहस्थी सम्हालो.”पिता जी मेरी तरफ देखने लगे, अचानक उनके चहरे में आये भाव से मेरा कलेजा कांप गया, वो मुझसे कभी इतने प्यार से बात नही करते थे…“अमित.”“जी जी पिता जी” मैं हकलाया जिससे खुशबू थोड़ी हँस पड़ी, जिससे मैं और भी नर्वस हो गया.“अगर















