तुम्हें कुछ ना कुछ तो लेना ही पड़ेगा।”“ओके, कॉफी!”“बस अभी लाती हूँ!”फिर मैडम कॉफी ले आयीं.“यह लो रंजित, कॉफी लो!”“थैंक्स!”“बिस्कुट भी तो लो…”“नहीं मैडम, इसकी क्या ज़रूरत है…!”“रंजित! हिंदी XXX मरीईईईई….. हाय इसी तरह और पेल… अपनी पूरी जीभ अपनी टीचर की गाँड में घुसा दे… और ठेल…. मैं क्या कोई पेड़-पौधा हूँ जो मुझ में खरबूजे हों?”“मैडम यह वाले खरबुजे” मैंने मैडम की चूचियों को दबाते हुए कहा।“आहह। उहहह।”“मैडम आपके तरबूज भी बहुत अच्छे हैं.”“क्या… तरबूज? ऐसे ही धक्के मारते रहो… रंजित… मेरे खरबूजों को ना भूलो… इन्हें तुम्हारे हाथों की सख्त ज़रूरत है!”“मैडम… आहह… आपकी चूत मारने में बहुत मज़ा आ रहा है!”“आआहहहह… रंजित… अपनी मैडम के खर्बूजों को तो खाओ!”फिर मैं धक्के देने के साथ-साथ मैडम के निप्पलों को मुँह में लेकर चूसने लगा।“आआआआईईईईईई…. आआआआहहह…. तेज…. मेरी मम्मी की क्या बात पूछती है… मैं मादरचोद नहीं हूँ… समझी??? तेज…. पेल!!!”कुछ देर मैं उनकी गाँड अपनी जीभ से चोदता रहा। फिर मैंने अपना लंड जो अब तक तन्ना कर लोहे की रॉड बन चुका था, उनके मुख के पास लाया और उनके मुख में पेलने लगा। इस्मत मैडम भी मेरे लंड को अपने मुख में पूरा का पूरा लेकर चूसने लगी।साथ में वोह मेरे लंड को थूक से भी तर कर रही थी। उन्हें पता था कि मैं अब उनकी गाँड मारने वाला हूँ इसलिए जितना हो सके उतना वो उसे चीकना















