हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. हिंदी XXX ऊँ…ऊँ…ऊँ….” करने लगी। फिर संतोष ने मुझे बड़ा दर्द दे दिया। चुदासा होकर उसने अपना अंगूठा मेरी गांड के कसे छेद में जबरन डाल दिया। मैं दर्द से तडप गयी थी। क्यूंकि उसका अंगूठा बहुत मोटा था और लग रहा था की मेरी गांड को फाड़ ही डालेगा। मैं परेशान होने लगी।“संतोष!! “ohh!! लग रही है!! तुम्हारी जवानी के क्या कहने है” संतोष बोला.“तो आज न जान!! .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” करने लगी। मैं कामुक होकर अपना पेट और सीना भी उपर उठाने लगी। मेरी चूत में आग की ज्वाला जल रही थी। मेरा बदन अब बहुत गर्म हो गया था। मैं खुद ही चुदासी होकर अपनी चूत को जल्दी जल्दी हाथ लगाकर सहलाने लगी।“संतोष!! प्लीस अंगूठा बाहर निकाल लो!! मुझे जल्दी से चोद डालो!! हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. my ass!!” मैं कहने लगी.संतोष जल्दी जल्दी मेरी गांड मारने लगा था। मेरे बदन में बिजली के झटके लग रहे थे। सारे बदन में चीटी जैसी काट रही थी। उसका लौड़ा बहुत मोटा था। मेरी तो जान ही निकाल रहा था। कुछ देर बाद उसने मेरी गांड के छेद में थूक दिया और जल्दी जल्दी चोदने लगा। अब छेद काफी फिसलनभरा हो गया। मेरे ताऊ के लड़के ने 15 मिनट मेरी गांड चोदी और मुंह पर अपना माल झार दिया। उसके बाद कई बार हम दोनों से सेक्स किया।















