उसके हाथों की गर्माहट से मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था.अचानक वो बोली “अंकुर आज मेरी तुम गांड मारो.”ये सुन कर में चौंक कर बोला “पागल हो तुम. हिंदी XXX ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.“इसका मतलब तुम दोनों भी एमडी और मिस्टर दीपक से चुदवाती हो?” मैंने पूछा.“हाँ दिल खोलकर और मज़े लेकर”. मिस्टर दीपक के केबिन से निकल कर हम एम डी के केबिन में आ गए. ठीक 12 बजे वो तीनो आ गयी. उसकी चीखे सुन कर में भी जोर जोर से धक्के लगा रहा था. एक दिन शाम को जब में प्रिया के कपडे उतार रहा था उसी समय दरवाज़े पर घंटी बज़ी. प्रिया ने अपनी फ्रेंड से बात कर के मना लिया. हम दोनों थक कर लेटे हुए थे की प्रिया और शबाना बाहर जाने लगी मैंने पूछा “कहाँ जा रहे हो”. थोड़ी ही देर में मैंने अपने लंड की पिचकारी उसकी गांड में कर दी. प्रिया और शबाना ने सच कहा था इशिका की चूत वाकई में कसी कसी थी ऐसा लग रहा था की में उसकी गांड ही मार रहा हूँ. हम लोग शाम तक चुदाई करते रहे मुझे नहीं मालूम शराब के नशे में कब सो गया और कब तीनो देविया मुझे सोता छोड़ कर चली गयी.सुबह मैं तैयार होकर अपने केबिन में किसी सोच में डूबा था की अचानक















