अपनी जीभ चला चला के मेरी बुर पी रहें थे. सर से बस ये कह दू की सर!! हिंदी XXX उनका भी किसी को चोदने का मन तो जरुर करता होगा.यही सब सोच सोच के मैं शुक्ला सर को याद करके मुठ मारने लगी. मैंने सर को देख लिया तो मेरा होश उड़ गया. एक बार पुलिस उनको इसी सब मामले में पकड़ भी चुकी थी.पर जादातर लोग कहते थे की अगर कोई लड़का शुक्ला शुक्ला सर से पढ़ ले तो उसको अच्छे नम्बरों से पास होना पक्का है. एक दो बार प्यार से अपने हथोडे से मेरी बुर पर थपकी दी. मैंने लाल सूती पैंटी पहन रखी थी. मेरी छातियों का उभर सारे ज़माने को चीख चीख के बता रहा था की मैं अब जवान हो गयी हूँ और चुदने लायक हो गयी हूँ. मैं निहायत ही जवान और खूबसूरत थी. सर से आवाज दी. सर को मस्ती सूझी और ये धचाक से उन्होंने मेरा मम्मा बस के होर्न की तरह बड़ा दिया. आज वो बड़ा सा लंड मुझको मिलने वाला था. शुक्ला सर बोले. नही सर, वो बात नही है !! उनको पीने लगे, अपना सिर सर ने मेरी दो टांगों के बीच रख दिया था.















