एक लड़की चुदवा दी तो बड़ा पक्ष लेने लगा।”पानी सिर से ऊपर गुजर जाता है। दोनों की एक साथ ‘खबरदार’ गूंज जाती है, मारने के लिए दौड़े अरुण को छवि रोकती है। मनीष पर उसकी उंगली तन जाती है,”खबरदार एक लफ्ज भी आगे बोले, चुपचाप यहाँ से निकल जाओ। मत भूलो कि लड़कियों के हॉस्टल में एक लड़की के कमरे में खड़े हो। यहीं खड़े खड़े अरेस्ट हो जाओगे।”मैं जल्दी-जल्दी कपड़े पहन रही हूँ।कमरे की चिल्लाहटें बाहर चली जाती हैं, दस्तक होने लगती है,”क्या़ बात है छवि, दरवाजा खोलो !”अब मामला मनीष के हाथ से निकल चुका है, वह कुंठा में अपने मुक्के में मुक्का मारता है।मैं सुरक्षित हूँ। मेरा खून चखने वाले उसे राक्षस को एक लात जमाने की इच्छा होती है !दुर्घटना से उबर चुकी हूँ। लेकिन स्थाई जख्म के साथ।छवि निर्देश देती है,”कोई कुछ नहीं बोलेगा। सब कोई एकदम सामान्य सा व्य़वहार करेंगे।”छवि दरवाजा खोलकर साथियों से बात कर रही है,’हाय अल्का, हाय प्रीति…. हिंदी XXX क्या कर रहे हो तुम लोग?”जल्दी खोलना जरूरी था। छवि बोली, “मैं देखती हूँ।” अरुण ने रोकना चाहा पर समय नहीं था। छवि ने अपने बिस्तर की बेडशीट खींचकर मेरे उपर डाली और दरवाजे की ओर बढ़ गई। मनीष छवि की मित्र मंडली में काफी करीब था। किवाड़ खोलते ही “बंद क्यों है?” कहता मनीष अन्दर आ गया।छवि ने उसे दरवाजे पर ही रोककर बात















