नंदिनी की मादक मुस्कराहट ने और भी मज़ा भर दिया.. चल इसमें तो और भी मज़ा आएगा..फिर हम एक दूसरे से मज़े लेने लगे.. हिंदी XXX चुद अपने अंकेश से मेरी प्यारी नंदिनी..फिर नंदिनी गाण्ड उठा उठा कर मेरा लंड लेने लगी.. नंदिनी की चूत का स्वाद आते ही मन चंगा तो आया था.. गुंजन तो तेरे लंड की बहुत तारीफ करती है..मैं: तुम लोग ये सब बातें भी करती हो ?नंदिनी : तुझे कौन ज्यादा अच्छी लगती हैं?मैं: नंदिनी, अभी तूने अपना पूरा जलवा दिखाया कहाँ है?नंदिनी : अच्छा तो यह बात है ? खाली करने वाला कोई है नहीं..फिर नंदिनी ने अपना कमीज़ उतार दिया.. वो मुझे गणित का प्रोब्लम है इसलिए मैं अकसर उसके घर जाती हूँ, इसमें बुरा क्या है?नंदिनी : गुंजन, तुम रोज दरवाजा क्यूँ बंद करके पढ़ते हो?गुंजन: अरे नंदिनी वो तो ऐसे ही कि कोई तंग न करे !नंदिनी : गुंजन, तू तो ऐसे जवाब दे रही हो जैसे कि मैं बच्ची हूँ, मुझे कुछ पता ही नहीं है।गुंजन: तू ऐसा क्यूँ बोले रही है ?नंदिनी : मैंने एक दिन दरवाज़े पर कान लगा कर आपकी पढ़ाई की कहानी सुनी थी ! इसलिए चाटने में बहुत मज़ा आ रहा था.. .नंदिनी : क्या करूँ अंकेश, ऐसे लंड मेरे हाथ में पहली बार आया है.. मैं भी नंदिनी को जी जान लगा के चोदने लगा..















