ये मेरी दीदी की सास है और मेरी मम्मी के बराबर है। फिर मामा जी बोले कि अब नाटक मत कर और अपनी लूँगी उतारकर मैदान में आ जा।फिर में झिझकते हुए बेड की तरफ बढ़ा तो मामा जी ने लपककर मेरी लूँगी खोल दी जिससे में पूरा नंगा हो गया। अब मेरा लंड लटका हुआ था, जिसे मामा जी अपने हाथ से पकड़कर आंटी को दिखाते हुए बोले कि लो भाई अब आज तुम भी जवान लंड का मज़ा ले लो, तुम मुझसे चुदवा-चुदवाकर बोर हो गयी होगी, चलो अब तुम भी चादर हटाकर अपनी चूत इस बेचारे को दिखा ही डालो।फिर उन्होंने सासू माँ की चादर हटा दी और मुझसे बोले कि बेटा सारी शर्म को इसकी चूत में डालकर खुद भी इसकी चूत में घुस जाओ। अब में तो पहले से ही सासू माँ को चोदने की सोचकर आया था और जब रूम में आने के बाद उनका नंगा बदन देखा तो मुझे अपनी मम्मी की याद आ गयी.बिल्कुल वैसी ही बड़ी-बड़ी चूचीयाँ और उन पर उभरे हुए ब्राउन कलर के निप्पल्स तनकर लंबे शेप में थे, जिसे फ़ौरन अपने होंठ में दबाकर चूसने का मन हुआ। फिर मैंने आंटी की चूची पर बहुत आहिस्ता से अपना एक हाथ रख दिया और सहलाने लगा। अब आंटी भी मुझसे शर्मा नहीं रही थी.और तब मामा जी ने उनकी चूत पर















