बताऊँ क्या-क्या किया है?माँ: श्श पागल है।मैं: हरकतें मत किया करो।और फिर मैं भी नहाने चला गया। करीब 9 बजे तक सब लोग नहा-धोकर बातों में लग गए थे। तभी मेरी नजर प्रिया मासी पर पड़ी और मुझे कल रात जो हुआ था वो याद आ गया। अब मुझे प्रिया मासी से बात करनी थी, लेकिन मैं सोचने लगा कि मासी से अकेले में बात करूँ कैसे। तभी नानी बोलीं:नानी: सुनो सारे, अभी सब नाश्ता करके तैयार हो जाना। शादी की खरीदारी करने चलना है।सविता: यही मैं सोचूँ कि किसी ने अभी तक शादी की खरीदारी के बारे में कुछ क्यों नहीं बोला।नानी: हाँ तो अब मैंने बोल दिया ना। अब चलो फटाफट तुम्हारे ये नाश्ते का करी-करम निपटाओ, फिर चलना।माँ: लेकिन माँ, अपन इतने सारे जाने कैसे जाएँगे?प्रतिज्ञा: दीदी, इनकी कार में चल लेंगे।अजित: हाँ, मैं अब सबको ले चलूँगा।अजित मौसा ये बोलते हुए बहुत खुश थे और साला हो भी क्यों ना, जिनको चोदना है, पूरे दिन उनके साथ ही घूमने को मिलेगा। साला कमीना। तभी नानू बोले:नानू: पर अजित बेटा, आज तू अपन को वहाँ आपकी पहचान के हलवाई के चलना है ना बात करने।अजित: पर पापा, आज तो मैं इनको लेकर जाऊँगा तो आज नहीं हो सकता। अपन कल ही चल पाएँगे।राजीव: अरे तो क्या हुआ, तुम पापा के साथ चले जाओ। इनको सबको मैं ले जाऊँगा।मैं: अरे










