राघव कार लेकर उसी मैदान मे आया, मैं ड्राइविंग सीट पर बैठी और राघव बगल वाली सीट पर.वो मेरी तरफ झुक कर कार स्टार्ट किया और क्लच-गियर के बारे मे बताने लगा, एसे मे उसका कंधा मेरी चुचियो पर टीका हुआ था और मेरे चेहरे से उसका सिर टच कर रहा था. हिंदी XXX राघव बिल्कुल नॉर्मल था लेकिन मैं नॉर्मल नही लग रही थी, फिर भी मैं विरोध नही करती थी. एक दो राउंड कार चलाने के बाद अचानक जोरदार बारिश होने लगी और हमलोग बीच मैदान मे कार रोक दिए. मेरी बुर मे खुजली हो रही थी, जब बर्दास्त करना मुश्किल हो गया तो मैं चुपके से एक मुड़ा हुआ बैंगन लेकर बाथरूम मे घुस गयी और उसे आधा बुर मे घुसा कर पेंटी चढ़ा ली.स्कर्ट के कारण बाहर से कुछ पता नही चलता था लेकिन क्या बताउ यारो, मैं तो दिन भर गान-गाना रही थी, सच मे एसी मस्ती तो चुदने मे भी नही थी, चलते-फिरते मेरी बुर के अंदर बैंगन अपना काम कर रहा था, मैं दिन भर मे 3-4 बार झड़ चुकी थी, वो भी सब के सामने. बुर से कुछ गरम तरल प़ड़ार्थ निकलता महसूस हुआ, शायद पेंटी का चुत वाला हिस्सा भींग चुका था, फिर राघव की एक उंगली पेंटी के उपर से ही मेरी बुर मे घुसने लगी.उसका लंड पेंट के अंदर टेंट की तरह खड़ा















