मेरी चुत का हाल, उसका लंड, सब कुछ, मेरी गांड भी खुल के बंद ही रही थी; वो भी रिकॉर्ड हो रहा था। 50 मिनट तक मैं लगातार उसके नीचे पिसती रही और मेरी चूत 6 बार झड़ चुकी थी। आखिर उसने भी जोर का नारा बुलंद किया और मेरी चूत को भर दिया, मुझे उसका गर्म वीर्य अपने अंदर महसूस हुआ। वो हांफ रहा था और मैं भी।मेरी सांसें बहुत तेज़… बहुत तेज़… रेल के इंजिन की तरह चल रही थी। वो खड़ा हुआ पैग बना कर कमरे में टहलने लगा। उसका पौने फुट का महालण्ड मेरे कामरस से जड़ तक गीला था और पूरी तरह चमक रहा था। तभी मैंने अपनी चूत पर हाथ लगा कर देखा तो मेरी जान मुठ्ठी में आ गयी।उसने मेरी चूत को पूरी तरह चौड़ा कर दिया था, पूरी तरह। मेरी चूत चूत न रह के एक गड्ढा लग रही थी।मैंने मन में ही कहा ‘रूपिंदर अब तो तू गयी, चूत अब बिल्कुल चौड़ी हो गयी है और अब तो तेरे पति का लंड भी तुझे शांत नहीं कर सकेगा।’मैं बेड पर पर पड़ी यही कुछ सोच रही थी कि ढिल्लों बोला- क्यों… मैंने कहा था न हाथ लगा लगा के देखोगी। अभी तो पूरी रात बाकी है मैडम। तेरी अच्छी तरह तसल्ली करा के भेजूंगा। ऐसी सर्विस करूँगा कि अपने जेल जैसे घर की















