उूऊउईईई….. जैसी तुम्हारी मर्ज़ी. हिंदी XXX मेरे दिल की धड़कन इतनी तेज़ हो गयी की खुद मेरे कानो में भी गूँजती लग रही थी.मैं उसके लंड की जड़ की ओर हाथ बढ़ाने लगी तो एहसाह हुआ कि लंड लंबा भी काफ़ी था. एक प्रकार से मेरा घूमना भी हो जाता था और घर वालो को कुछ कहने का मौका भी नहीं मिलता था. वो अंदर डालने की कोशिश कर रहा था.मैं बोली,“क्या कर रहे हो जल्दी घुसाओ ना अंदर. इसे मैं केवल अनुभव कर रही थी. मररर्र्र्र्र्ररर गइईईई….. सच तो ये था की मैं उसे छ्छूने को उतावली हो रही थी. उसकी इन्ही सब बातो के कारण मैं उसे पसंद करती थी और एक प्रकार से मैने अपना तन मन उसके नाम कर दिया था.एक दिन मैं उसके साथ कार में थी. चूत में लंड की हल्की हल्की सरसराहट अच्छी लगने लगी तो मुझे आनंद आने लगा. मेरे ऐसा करते हुए उसने झट से मेरे निपल को मूह में ले लिया और चूसने लगा. मगर प्रत्यक्ष में बोली, “तुम देख लोगे उसे, मुझे दिखाने में शर्म आ रही है. अब बाकी क्या रह गया है?”“एक इंच बाकी रह गया है.” कहते ही उसने मुझे कुछ बोलने का मौका दिए बगैर ज़ोर से झटका मार कर लंड को चूत की गहराई में पहुँचा दिया.















