सहलाने लगी… “मैं भी कैसी पागल हूँ..”“आप भी ना दीदी.. हिंदी XXX वो प्यार से मेरे बाल सहलाती.. मेरे अचानक इस हमले से दीदी चौंक पड़ीं.. अभी अभी घिसाई की मस्ती पूरी तरह ख़तम नहीं हुई थी शायद…मुझ से रहा नहीं गया… मैं उनके पैरों के बीच बैठ गया.. बस होता जा रहा था..फिर मैने उन्हें अपने सीने से अलग किया.. पिचकारी छूटे जा रही थी… दीदी भी उछल उछल रही थी.. ““हां दीदी..”“तो फिर चल लुडो खेलते हैं..”मेरे लिए उनके ये शब्द जादू का काम करते.. डीडीईईईईईईईई उफफफफफफफफ्फ़ क्या हो रहा है… आआआआआआहह “और मैं झाड़ रहा था बूरी तरह… बार बार लंड झटके खा रहा था.. मैं समझती हूँ.इस उम्र में ये सभी नॉर्मल लड़कों के साथ होता है… मुझे तो खुशी हुई के मेरा नंदू भी नॉर्मल है…”मेरी जान में जान आई, पर दीदी के इस रवैय्ये से फिर मैं हैरान था… और इसी हैरानी में मैने पूछा.“पर दीदी आप को कैसे मालूम हुआ ??.”‘मैं तेरे कमरे में आ रही थी, पर जैसे ही अंदर पैर रखा.. उनका चूतड़ मेरे लंड सहित मुझे उपर उछल रहा था.“हाई… ऊवूऊवूयूयुयूवयू आआआअ ऊवूऊवूऊयूयुयूवयू..”और वो भी चूत से जोरदार पानी छोड़ते हुए ढेर हो गयीं. फिर चाटना वहाँ… अब हट जा…”“नहीं दीदी.. उनकी चूत के बाहर मेरे लंड से निकली सफेद पानी और कुछ और उनकी चूत से निकला रस का मिला जुला बड़ा ही















