मैं पागल हो उठा था… और अपनी कमर से उपर अपने आप को उपर उठा लेता झटके से मस्ती में.बार बार मैं उछल रहा था, उन्हें जाकड़ लिया उनकी पीठ से और पीठ चूमने लगा… चाटने लगा.. दीदी का चेहरा और भरे स्तनों का मेरे सीने पर दबाब याद करते मैं लगातार चॅम्डी उपर नीचे कर रहा था, अचानक मेरा लंड काफ़ी कड़ा हो गया और फिर मुझे ऐसा लगा मानो पूरे शरीर से कुछ वहाँ मेरे लंड के अंदर आ रहा है, कुछ जमा हो रहा है..मेरे चॅम्डी उपर नीचे करने की गति अपने आप तेज़ हो गयी.. हिंदी XXX फिर मैने अपना चेहरा उनकी चूत के बिल्कुल करीब ले गया और अंदर देखा,कितनी मस्त थी, अभी भी अंदर उनकी मांसल और गुलाबी चूत थोड़ी फदक रहीं थी.. घबडा मत.. मैं हैरान था अपने में इस बदलाओ को देख.. सारा मूड किर कीरा हो गया…“क्या दीदी… आप भी ना.. फिर बंद कर दिया… वापस पलंग की तरफ बढ़ा… दीदी लेटी थीं… उनका आँचल अभी भी नीचे लटक रहा था.. बड़े लड़ प्यार और स्नेह से मुझे रखा जाता.. दीदी और उनका नंदू एक हो कर पड़े थे.मैं तो जैसे किसी स्वप्न लोक में खोया था… ये सब इतनी जल्दी हो गया… मुझे विश्वास नही हो रहा था… ये सपना है या सच..















