मासूम देसी कुड़ी की गर्म कहानी

मेरे धक्के और रोज़ा की हाय हाय तेज़ होती गयी और हम दोनों एक साथ झड़ गए, मैंने निढाल हो कर रोज़ा पर पडा था और वो मुझे कस कर पकडे सो रही थी. मैंने रोज़ा को हौसला दिलाया कि सब ठीक हो जायेगा.हालाँकि मुझे मालूम था कि एक दफे कोई इन चक्करों में पड़ गया तो उसका वापस आना मुश्किल ही है. हिंदी XXX रोज़ा को चोदने का ऐसा सुख तो शायद उसके पति को भी नहीं मिला होगा. रोज़ा की चूत इतनी गीली हो गयी थी की उसकी चूत का पानी बाहर रिस्न्ने लगा था और उसकी सलवार भी गीली हो गयी थी.रोज़ा ने अपना नाड़ा ढीला किया और मेरे सामने घोड़ी बन गयी. फिर जब मैं बालकनी में सुट्टा मारने गया तो वो भी वहीँ आ गयी और बोली “ये बुरी आदत है छोड़ क्यूँ नहीं देते” तो मैंने कहा “फिर क्या करूँगा”. गुडगाँव में रोज़ा जहाँ इंटरव्यू देने जा रही थी वहां का एच आर मेरे बड़े भाई का बैचमेट था सो मैंने उसे कहा की इंटरव्यू के बाद मुझे मेसेज डाल देना. रोज़ा की चूत इतनी गीली हो गयी थी की उसकी चूत का पानी बाहर रिस्न्ने लगा था और उसकी सलवार भी गीली हो गयी थी.रोज़ा ने अपना नाड़ा ढीला किया और मेरे सामने घोड़ी बन गयी.

मासूम देसी कुड़ी की गर्म कहानी

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