शादीशुदा बहू ने साड़ी-पेटीकोट उतारकर पराए मर्द के साथ चुदाई की रसीली रात

हूँ… हूँ.. हिंदी XXX हूँ… हूँ.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. मैंने तो कभी नही देखा। इससे तो चुदने में और भी मजा आएगा.”मै- “आज तुम मुझसे चुदने ना आती तो हमेशा के लिए ये मौक़ा खो देती.”इतना कहकर मै उसके पास जाकर उसके बदन पर अपना लंड लगाने लगा। उसने मेरे लंड को छुआ। कहने लगी- “कितना गर्म हो गया है.”मै- “इतना तो कुछ भी नही है। तुमको देखकर इससे भी ज्यादा गर्म हो गया था। कल से आज तक मैं कई बार मुठ भी मार चुका हूँ.”सुप्रिया मेरे लंड को सहलाने लगी। उसकी चूत में भी खुजली होने लगी। वो उठ कर मुझसे चिपक गई। मैंने उसे कसकर दबा लिया। उसे दबाते ही वो और ज्यादा उत्तेजित हो गई। मैंने अपना होंठ उसके होंठ पर रख कर चूमने लगा। उसके माथे को चूमते हुए। उसके होंठो को चूसने लगा।उसके सिल्की बालो को छूने में बहुत मजा आ रहा था। मैं उसके बालो को सहला कर उसके होंठो को पीने में मस्त हो गया। उसकी साँसे तेज हो रही थी। वो जोर जोर से सांस लेने लगी। उसकी गर्म साँसे मेरे नाक पर पड रही थी। होंठ को काटते ही वो जोर से “..अहहह्ह्ह्हह स्सीई ई ई इ….अ अ अ अ अ….आहा …हा हा हा” की आवाज के साथ चुसाई करवा रही थी।वो भी मेरा साथ दे रही थी।सुप्रिया जोर जोर से सब

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